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आपकी बात, सीबीआई पर बार-बार सवाल क्यों उठते हैं?

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25.10.2020

राजनीतिक दखल बंद हो
सीबीआइ देश की महत्त्वपूर्ण जांच एजेंसी है। इस पर बार-बार सवाल उठना चिंता का विषय है। इससे सीबीआइ की साख और कार्यशैली पर भी प्रश्न चिह्न लगता है, जिससे इस जांच एजेंसी पर देश की जनता का विश्वास भी डगमगा रहा है। सीबीआइ पर सवाल उठने का मतलब देश की सरकार पर सवाल उठना है। इसीलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर आंच न आने दे। सरकार यह सुनिश्चित करे कि सीबीआइ निष्पक्षता और निष्ठा के साथ कार्य करेे। सीबीआइ पर सवाल उठने के पीछे कहीं न कहीं राजनीतिक हस्तक्षेप और राजनीतिक दबाव के साथ सरकार का पर्याप्त सहयोग नहीं मिलना है। कईं बार राज्यों और केंद्र सरकार के मतभेदों का खमियाजा सीबीआइ को भुगतना पड़ता है। इससे इससे सीबीआई पर सवालिया निशान लग जाता है।।
-रमेश कुमार लखारा, बोरुंदा,जोधपुर
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सीबीआइ को सुप्रीम कोर्ट के अधीन किया जाए
भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध की जांच, गंभीर आर्थिक अपराधों और अंतरराज्य अखिल भारतीय प्रभाव वाले सनसनीखेज अपराध की जांच के लिए सीबीआइ एक विशेष एजेंसी है। चूंकि यह संस्था केंद्र सरकार के अधीन है, इसीलिए इसकी कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठते हैं। राज्यों में जांच से पहले राज्य से अनुमति लेना अवश्य है। सत्तारुढ़ दल इसकी जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हंै। विपक्ष इस बात का विरोध करता है, तो सत्ता में आते ही उनके सुर भी बदल जाते हैं। चूंकि यह केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए केंद के किसी घोटाले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। इसलिए अगर सीबीआइ की पारदर्शिता बढ़ानी है, तो इसे सुप्रीम कोर्ट के अधीन करना होगा।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा
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स्वतंत्र नहीं है सीबीआइ की कार्यप्रणाली
सीबीआइ सत्ताधारी दल के निर्देश पर कार्य करती है। अधिकतर छापे राजनीतिक विरोधी पार्टियों के नेताओं पर ही पड़ते हैं। दूसरी बात इसके जाल में सत्ताधारी दल के बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छोड़ो-छोटी मछलियां भी नहीं फंसती हैं, उनके आका उन्हें बचा लेते हैं। स्पष्ट है कि सीबीआइ........

© Patrika


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