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आपकी बात, कानून के बाद भी बाल विवाह क्यों नहीं रुक रहे?

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21.10.2020

अभिशाप है बाल विवाह
भारत में बाल विवाह आज भी चिंता का विषय है। बाल विवाह किसी बच्चे को अच्छे स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है। कम उम्र में विवाह से लड़कियों को हिंसा, दुर्व्यवहार और उत्पीडऩ का सामना करना पड़ता है। शिक्षा के अवसर कम हो जाते हंै। बाल विवाह लड़कियों के लिए सदा एक अभिशाप ही रहा है। बाल विवाह रोकने के लिए समय-समय पर कई कानून भी बनाए गए, लेकिन आज भी समाज में बाल विवाह का कलंक ज्यों का त्यों बना हुआ है। आज भी न जाने कितनी मासूम लड़कियां कम उम्र में ही ब्याह दी जाती हैं। जिस उम्र में उन्हें पढ़ाई-लिखाई करनी होती है, उस उम्र में वे अपनी गृहस्थी का बोझ संभालती नजर आती हंै।
-ऋतिका आर्य, जयपुर
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न समझें लड़कियों को बोझ
बाल विवाह अभिशाप है। आश्चर्य की बात है कि इस कुप्रथा को समाज का पढ़ा-लिखा तबका भी अपनाए हुए है। पढऩे-लिखने की कच्ची उम्र मं नन्हें-मुन्नों को विवाह बंधन में बांध उनका भविष्य बर्बाद कर दिया जाता है। गरीबी, लड़कियों की शिक्षा का कम स्तर तो समस्या का कारण है ही लड़कियों को आर्थिक बोझ समझने की मानसिकता भी बाल विवाह जैसी कुरीतियों को बढ़ावा देती है। इस कुप्रथा को रोकने के लिए बालिकाओं के पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना होगा। गरीबों के लिए रोजगार देने वाले कार्यक्रम चला कर इन परिवारों में होने वाले बाल विवाहों को नियंत्रित किया जा सकता है। बाल विवाह के दुष्परिणामों से अभिभावकों को अवगत करा कर भी इस पर रोक लगायी जा सकती है। मात्र कानून बना देने से कुछ नहीं होता है, उन्हें अमल में लाने के लिए सामाजिक जागरूकता भी बहुत जरूरी है। साथ ही स्थानीय स्तर पर सेवाभावी लोगों द्वारा समय-समय पर कैम्पेन चला कर बाल विवाह के नुकसान से लोगों को अवगत कराना चाहिए।
-नरेश कानूनगो, बेंगलुरु
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समाज निभाए जिम्मेदारी
बाल विवाह एक सामाजिक समस्या है और इसका हल सामाजिक जागरूकता से ही सम्भव हो सकेगा। केवल कानून बनाने से यह कुरीति खत्म नहीं होने वाली है। अगर इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करना है तो इसके लिए समाज को ही आगे आना होगा तथा बालिकाओं के पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना होगा। समाज में शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। अभिभावकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति........

© Patrika


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