विदेशी साहित्य पर फिल्म बनने से फिल्मों से दूर हो रही है भारतीयता: प्रदीप सरदाना
‘साहित्य और सिनेमा-सामाजिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ’ में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में सरदाना मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. सरदाना ने आगे कहा- जब से सिनेमा का जन्म हुआ तभी से उसका संबंध साहित्य से है. भारत की पहली मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ जहां पोराणिक साहित्य पर थी. वहां महाकवि कालिदास की कालजयी कृति ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ पर 1920 में ही ‘शकुन्तला’ फिल्म बन गयी थी. साथ ही ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के कथानक पर तो मूक युग से अब तक विभिन्न रूपों में अनेक फिल्में बनती आ रही हैं. साथ ही शरत चन्द्र, टैगोर, प्रेम चंद, रेणु, राजेन्द्र सिंह बेदी, आरके नारायण, कमलेश्वर, मन्नू........
