विमानन क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाना होगा
डॉ अश्विनी महाजन, राष्ट्रीय सह-संयोजक, स्वदेशी जागरण मंच
Aviation Sector: बढ़ती जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय, बढ़ती मध्यम वर्ग की संख्या, बदलता जनसंख्या का स्वरूप और युवाओं की बढ़ती जनसंख्या, स्टार्टअप तथा उद्यमिता का विकास, सरकारी कर्मचारियों की बेहतर होती आर्थिक स्थिति समेत कई ऐसे कारण रहे, जिससे वायु यात्रा की मांग में वृद्धि होती रही. विमानन को गति देने में सरकारी नीतियां भी सहायक रहीं. निजी क्षेत्र को एयरपोर्ट बनाने हेतु प्रोत्साहन, नीतिगत सरलता आदि ने भारत के विमानन क्षेत्र को नये पंख दिये. भारत में घरेलू यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती रही है और वित्त वर्ष 2024-2025 में यह संख्या 1,653.8 लाख रही. अंतरराष्ट्रीय यात्रियों (338.6 लाख) को मिला लें, तो कुल 1,992 लाख यात्रियों ने भारत में हवाई यात्रा की. बीते 11 वर्षों में एयरपोर्टों की संख्या 2014 के 74 से बढ़ती हुई 160 से अधिक हो चुकी है.
वायु मार्ग के यात्रियों की संख्या की दृष्टि से भारत आज दुनिया में तीसरे स्थान पर है. निजीकरण के दौर में विमानन क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ‘एयर इंडिया’ के एकाधिकार के समाप्त होने के बाद, देश में निजी विमानन कंपनियों का दौर आया. इसके साथ ही, विमान यात्रा आम लोगों की पहुंच में आ गयी. कैप्टन गोपीनाथ,........
