menu_open Columnists
We use cookies to provide some features and experiences in QOSHE

More information  .  Close

संशोधन से मर गयी ट्रांसजेंडर कानून की आत्मा

14 0
07.04.2026

Transgender Law : चलिए, ट्रांसजेंडर कानून में हुए संशोधन की बात ‘कामसूत्र’ से शुरू करते हैं. संस्कृत साहित्य के इस कालजयी ग्रंथ में स्त्री और पुरुष के अतिरिक्त एक तृतीया प्रकृति का जिक्र किया गया है. वात्स्यायन के अनुसार, यह मामला ‘प्रकृति’, यानी स्वभाव या मनोवृत्ति का है, शरीर की लैंगिक बनावट का नहीं. इस तीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जिनका शरीर तो पुरुष जैसा है, पर मन और हाव-भाव या तो स्त्रीरूपिणी है, या कम से कम वह नहीं है जिसे समाज पुरुष के रूप में पहचानता है. या वह जो जन्म से लड़की मानी गयी, पर जिनका आचार-व्यवहार स्त्री के लिए बनाये खांचे में फिट नहीं बैठता. वात्स्यायन इस तीसरी प्रकृति को किसी विकार की तरह देखने की बजाय, बस एक अन्य श्रेणी की तरह दर्ज करते हैं.

ट्रांसजेंडर शब्द भले ही नया हो, पर पश्चिमी संस्कृति से संपर्क से सैकड़ों वर्ष पहले हमारे यहां इस बात की कमोबेश सहज स्वीकारोक्ति थी कि कुछ लोग तन से और कुछ लोग मन से पुरुष बनाम स्त्री के दो डब्बों में कैद नहीं हो सकते. हमारी भाषाओं और परंपराओं में अनगिनत कथाएं और मिसाल यह साबित करते हैं कि लैंगिक विविधता का विचार हमारे यहां कहीं बाहर से नहीं आया. दरअसल, औपनिवेशिक संस्कृति के वर्चस्व के चलते हमने इस लैंगिक........

© Prabhat Khabar