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आपकी बात, एमएसपी पर खरीदी की अनिवार्यता से क्या बदलाव आएगा?

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22.10.2020

एमएसपी में सुधार की जरूरत
एमएसपी को एक सामाजिक न्याय के कदम के रूप में भी देखा जा सकता है। इसके माध्यम से निर्धन किसानों की सहायता की जा सकती है। एमएसपी ने भारत की विशाल जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाई है। भारत में एमएसपी के निर्धारण में राजनीतिक प्रभाव रहा है, जिसके कारण कृषि क्षेत्र पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव भी पड़े हैं। सरकार सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में समान रूप से बढ़ोतरी नहीं करती, जिससे किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। तुलनात्मक रूप से निर्धन लोग मोटे अनाज का उत्पादन करना अधिक पसंद करते हैं, लेकिन भारत में गेहूं व चावल के लिए एमएसपी को अधिक बढ़ाने की कोशिश की गई है। इसी कारण भारत में मोटे अनाज और दालों के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। अत: सरकार को इस नीति में सुधार लाना चाहिए।
-डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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किसानों की हालत में सुधार होगा
भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। ऐसे में जीडीपी का स्तर उच्च रखने के लिए एमएसपी पर फसल की खरीद आवश्यक है। वर्तमान में मात्र 6 प्रतिशत किसान ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल को बेचते हैं। भारत में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को निर्धारित करता है। इसकी घोषणा फसल बुवाई से पहले हो जाती है। ऐसे में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद की जाती है, तो किसान स्व विवेक से यह तय कर सकता है कि उसको कौन सी फसल लाभदायक रहेगी, उसी के आधार पर बुवाई करेगा एवं किसान की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। साथ ही साथ बाजार में बिचौलियों तथा आढ़तियों की मनमानी बंद होगी।
-पंकज नेहरा, चूरू
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एमएसपी से कम पर न बिके फसल
सरकार देश में अनाज, दलहन, तिलहन आदि प्रमुख फसलों का एक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करती है। सरकार अपने खरीद केंद्रों के माध्यम से एमएसपी पर किसान से फसल खरीद लेती है। एमएसपी........

© Patrika


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