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बजट 2026: राजकोषीय घाटे और ऋण को नियंत्रित करने की घोषणा स्वागत योग्य

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03.02.2026

डॉ सुधांशु कुमार, अर्थशास्त्री

Budget 2026: संसद में बजट 2026 के साथ हाल ही में तीन अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं—आर्थिक सर्वेक्षण, सोलहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट और केंद्रीय बजट 2026. ये तीनों दस्तावेज मिलकर भारत की आगामी आर्थिक दिशा, सामाजिक प्राथमिकताओं और संघीय वित्तीय ढांचे की रूपरेखा तय करते हैं. वित्त आयोग की सिफारिशें राज्यों की वित्तीय क्षमताओं और संसाधनों के बंटवारे को प्रभावित करती हैं. आर्थिक सर्वेक्षण वर्तमान आर्थिक-सामाजिक स्थिति के साथ भविष्य की संभावनाओं का आकलन प्रस्तुत करता है, और बजट सरकार की नीति-प्राथमिकताओं को ठोस रूप में सामने रखता है. इन तीनों में केंद्रीय बजट वह दस्तावेज है, जो जनता की अपेक्षाओं, राजनीतिक बहसों और आर्थिक वास्तविकताओं के सबसे निकट होता है.

ऐसे तो हर वर्ष संसद में देश का एक बजट पेश होता है, लेकिन उसके भीतर कई भारत बसते हैं—शहरों का भारत, गाँवों का भारत, युवाओं का भारत, महिलाओं का भारत, किसानों का भारत, विभिन्न राज्यों का भारत और उद्यमियों का भारत. इन सभी के सपने और ज़रूरतें अलग-अलग हैं. इसलिए बजट की सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि क्या वह इन उम्मीदों को अवसरों में बदल पाता है. निर्मला सीतारमण के पिछले बजट भाषणों को गौर से देखें तो हर वर्ष प्राथमिकताओं को एक नए “फ्रेमवर्क” में प्रस्तुत किया गया है.........

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