बच्चों को 'क्यों' पूछने के लिए प्रेरित करें

(असिस्टेंट प्रोफेसर केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभाग आइआइटी(आइएसएम), धनबाद)

हर युग को उन प्रश्नों के लिए याद किया जाता है, जिन्हें पूछने का साहस उस पीढ़ी ने किया. कभी मनुष्य ने सोचा था कि वह पक्षियों की तरह उड़ सकता है? एक समय यह भी प्रश्न था कि क्या घातक बीमारियों का इलाज संभव है? वैज्ञानिकों ने आकाश की ओर देखा और पूछा कि क्या मनुष्य चंद्रमा तक पहुंच सकता है? आज की युवा पीढ़ी के सामने इससे भी बड़े प्रश्न हैं. क्या भविष्य में मंगल या चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्तियां बसेंगी? क्या वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी ईंधन में बदला जा सकेगा? क्या बीमारियों का पता उनके लक्षण दिखाई देने से पहले लगाया जा सकेगा?

क्या स्वच्छ ऊर्जा हर व्यक्ति तक पहुंचेगी? क्या क्वांटम तकनीक कंप्यूटिंग की दुनिया को पूरी तरह बदल देगी? इन प्रश्नों के उत्तर केवल पुस्तकों में नहीं मिलेंगे. इनके उत्तर जिज्ञासा, कल्पनाशीलता, साहस, धैर्य और निरंतर प्रयास से मिलेंगे. आज की 30 वर्ष से कम आयु की पीढ़ी मानव इतिहास के सबसे रोमांचक दौर में जी रही है. पहले कभी किसी पीढ़ी के पास इतना विशाल वैज्ञानिक ज्ञान, इतनी शक्तिशाली कंप्यूटिंग क्षमता, आधुनिक प्रयोगशालाएं, एआइ के उपकरण और वैश्विक सहयोग का अवसर नहीं था.

आज एक साधारण........

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