मधुमक्खियां बचेंगी, तभी यह दुनिया भी बचेगी |
–अनील प्रसाद हेगड़े, पूर्व सांसद-
World Bee Day : बीस मई यानी आज आधुनिक मधुमक्खी पालन के प्रणेता, एंटन जानसा का जन्मदिन है. यह दिन ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. विदित है कि मधुमक्खियां खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. परागण (पॉलिनेशन) और पैदावार बढ़ाने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. दुनिया की खाद्य सुरक्षा का एक-तिहाई इन्हीं पर निर्भर है. मधुमक्खी और अन्य परागणकर्ता (पॉलिनेटर) के महत्व को उजागर करने, मधुमक्खियों के संरक्षण और उनके सामने मौजूद खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने इस दिन को ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ घोषित किया था.
इसे विडंबना ही कहेंगे कि वर्तमान कृषि प्रणाली में जहां मधुमक्खियां प्राकृतिक परागणकर्ता के रूप में खाद्य उत्पादन और फसल की पैदावार बढ़ाने में अमूल्य योगदान दे रही हैं, वहीं पैदावार बढ़ाने के नाम पर अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहे रासायनिक खाद और कीटनाशक मधुमक्खियों के अस्तित्व को ही संकट में डाल रहे हैं.........