मासिक धर्म अवकाश पर सुप्रीम कोर्ट का तर्क सही
-कमलेश जैन- (वरिष्ठ वकील,सुप्रीम कोर्ट)
Menstrual Leave : भारतीय कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी और उनके स्वास्थ्य अधिकारों को लेकर ‘मासिक धर्म अवकाश’ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. यह विषय जितना मानवीय और जैविक है, उतना ही कानूनी और पेशेवर जटिलताओं से भरा हुआ भी. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मुद्दे पर दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार करने और न्यायाधीशों की टिप्पणियों ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि मासिक धर्म के दौरान अनिवार्य अवकाश की मांग महिलाओं के सशक्तिकरण का साधन है या यह अनजाने में उनके पेशेवर विकास के लिए एक अदृश्य दीवार खड़ी कर देगा.
मासिक धर्म में अवकाश देना स्त्रियों की नौकरी में अवरोध पैदा करता है, ऐसा मानना है सर्वोच्च न्यायालय का. प्रतिमाह उन मुश्किल दिनों के दौरान महिलाओं को अवकाश दिये जाने का सवाल यदा-कदा न्यायालय तथा नौकरी देने वालों को चुनौती देता रहता है. सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत एवं न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची ने हाल ही में इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि यह प्रश्न अंतत: नियोक्ताओं के ऊपर ही छोड़ देना चाहिए. हम इस पर कितना समय बर्बाद करें. अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने तीसरी बार इस........
