झारखंड के नेल्सन मंडेला थे शिबू सोरेन, पढ़ें, शैलेंद्र महतो का खास लेख |
-शैलेंद्र महतो, झारखंड आंदोलनकारी सह पूर्व सांसद, जमशेदपुर-
Shibu Soren: शिबू सोरेन झारखंड के नेल्सन मंडेला और भारत वर्ष में आदिवासी समुदाय के सबसे बड़े नेता के रूप में याद किये जायेंगे. उन्होंने झारखंड राज्य की परिकल्पना की. झारखंडी संस्कृति, अस्मिता और पहचान को राजनीतिक धरातल पर उतारा. झारखंड के राजनीति क्षितिज पर उभरे शिबू सोरेन की संघर्ष गाथा एक छोटे से गांव नेमरा के अत्याचारी और आततायी सूदखोरों और महाजनों के शोषण, उत्पीड़न और दोहन के विरोध से शुरू हुई. वह चिंगारी जो नितांत स्थानीय स्तर पर अन्याय और शोषण के खिलाफ प्रस्फुटित हुई.
प्रतिकूलताओं से लड़ने-जूझने और सामाजिक, आर्थिक समस्याओं से टकराने का जज्बा बालक शिबचरण मांझी को काफी अल्प आयु में प्राप्त हुआ, जब उनके शिक्षक पिता सोबरन मांझी की हत्या समाज के दबंग ठेकेदार, सूदखोर और महाजनों द्वारा कर दी गई. संघर्ष के दिनों में बालक शिबचरण मांझी का नाम शिबू सोरेन में बदल गया.
हजारीबाग जिला के गोला प्रखंड के नेमरा गांव में 11 जनवरी 1944 को जन्मे बालक का नाम शिबचरण मांझी से लेकर शिबू सोरेन और फिर गुरुजी कहलाने तक का जीवन सफर संघर्षशील और चर्चित रहा है. शिबू........