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आपकी बात, पशुओं के प्रति क्रूरता कैसे रोकी जा सकती है?

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26.10.2020

सख्त कानून के साथ जुर्माना भी हो
पशुओं के साथ क्रूरता की घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हंै। सड़क पर रहने वाले जानवरों से लेकर पालतू पशुओं तक को क्रूरता झेलनी पड़ती है। दूध निकालकर गायों को भी यूं ही छोड़ दिया जाता है। भूखी-प्यासी गाएं कचरे में मुंह मारती नजर आती हैं। कुत्ते बहुत ज्यादा क्ररता झेलते हैं। पाड़े, घोड़े, खच्चर, ऊंट, बैल, गधे जैसे जानवरों का इस्तेमाल माल की ढुलाई के लिए किया जाता है। इस दौरान उनके साथ बहुत ज्यादा क्रूरता होती है। पशुओं की तकलीफों को लेकर बिलकुल भी जागरूकता नहीं है। पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए कानून सख्त होना चाहिए ,जेल भी हो और साथ-साथ भारी जुर्माना भी हो, ताकि लोगों में डर पैदा हो। मीडिया पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों के बारे में ज्यादा से ज्यादा बताए। पशु कल्याण अधिकारी के नाम, फोन नंबर का प्रचार किया जाए। पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए काम करने वाले सभी सरकारी विभागों और संस्थाओं के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जाए, ताकि लोगों में जागरूकता पैदा हो।
-कपिल बाजपेई, प्रताप नगर, जयपुर
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हर प्राणी को है जीने का अधिकार
पशु-पक्षियों की रक्षा करना हमारा पुनीत दायित्व है। कोरोना वायरस का संक्रमण प्रकृति के साथ किए अन्याय का प्रतिफल माना जा रहा है। कोरोना संक्रमण कहीं ना कहीं यह उम्मीद लेकर आया कि शायद मानव जीवनदायी प्रकृति और इसके सभी हिस्सेदारों के प्रति अब संवदनशील होगा, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए जिला मुख्यालयों पर हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाने चाहिए। इस चराचर जगत में प्रत्येक प्राणी को जीने का अधिकार है। इनके प्रति संवेदनशील बनना होगा। ग्रामीण स्तर पर से लेकर जिला स्तर पर जीव दया संस्थानों की स्थापना होनी चाहिए।
-विद्या शंकर पाठक, सरोदा, डूंगरपुर
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कानूनों का पालन करवाया जाए
पशुओं का उत्पीडऩ और क्रूरता कोई नई समस्या नहीं है। सदियों से पशुओं के साथ बुरा व्यवहार होता आया है। प्राचीनकाल में हाथी-घोड़ों का उपयोग युद्ध के समय बड़ी संख्या में किया जाता था। उपयोगी होने के बावजूद मानव जानवरों पर क्रूरतापूर्ण अत्याचार करता रहता है। इनके रहने के स्थान बदहाल होते हैं, उन्हें खाने के लिए पर्याप्त मात्रा मे चारा-पानी नहीं दिया जाता है। क्षमता से अधिक माल उन पर लाद दिया जाता है। वनों की अंधाधुंध-कटाई, नवीन निर्माण कार्यों के लिए खेती योग्य जमीन का कम होना भी पशुओं की बदहाली का कारण है। विभिन्न अधिनियमों के माध्यम से पशुओं के अधिकारों को सुरक्षित भी किया गया है। हाल ही में........

© Patrika


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