We use cookies to provide some features and experiences in QOSHE

More information  .  Close
Aa Aa Aa
- A +

ऋण और ब्याज पर मोरेटोरियम: क्या होनी चाहिए नीतिगत प्रतिक्रिया

5 0 0
22.10.2020

ऋण और ब्याज पर स्थगन का मामला कुछ हैरतअंगेज घटनाक्रमों के साथ दिलचस्प मोड़ लेता जा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब इस लड़ाई में कोर्ट की भी भूमिका शामिल हो गई है। अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि अदालतें आम आदमी की दिवाली की बात कर रही हैं, जो कि ऐसी स्थिति है, जिसे शुद्ध रूप से कानून की व्याख्या आदेशित नहीं करती, बल्कि त्योहारों के मौके पर यह कार्यपालिका के कामकाज में पडऩे जैसा है। इस संबंध में किसी भी फैसले का सरोकार पूरी तरह व्यावसायिक है, और अदालतों को इसमें नहीं पडऩा चाहिए।


ऋण एक अनुबंध होता है, लेनदार और देनदार के बीच। हर ऋण अनुबंध अपने आप में अलग है। इन अनुबंधों में राहत से लेकर 'फोर्स मेज्योर' (आपात स्थिति में दोनों पक्षों को जिम्मेदारी से मुक्त करने) संबंधी प्रावधान होते हैं। किसी सामान्य स्थिति में लोन लेने वाला व्यक्ति व्यापार में नुकसान या........

© Patrika


Get it on Google Play