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बयान में समाज की सच्चाई

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14.09.2017

अद्वैता काला

वरिष्ठ टिप्पणीकार

इस देश में किसी व्यक्ति को क्या खाना है और क्या पहनना है, यह किसी नियम-कानून या किसी विचाराधारा द्वारा तय नहीं किया जा सकता है. मौजूदा राजनीतिक और वैचारिक बहस के संदर्भ में संघ प्रमुख का बयान स्वागतयोग्य है.

वे अनुभवी और दूरदर्शी सोच वाले व्यक्ति हैं और भारतीयता पर उनकी समझ व्यापक है. हर किसी को अपना मानने की हमारी परंपरा रही है. आज जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही है, सही मायनों में वही संघ की सोच है. लेकिन, एकतरफा एजेंडा चलानेवाले कुछ लोग संघ के आदर्शों को गलत अर्थों में प्रचारित करते रहे हैं. भागवत जी देश की समस्याओं, चुनौतियों और संभावनाओं से भलीभांति वाकिफ हैं. भारत की अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्या भूमिका होगी और देश का रुख क्या होगा, उन्हें इसकी परख है.

जहां तक खान-पान और पहनावा तय करने की बात है, आजादी के बाद इसकी शुरुआत कांग्रेस ने ही की है.

ध्यान रहे कि गौ-हत्या को रोकने के लिए जो भी कानून बनाये गये, वे कांग्रेसी सरकारों द्वारा बनाये गये. यह काम दो-तीन साल में भाजपा सरकार आने के बाद नहीं तय हो गया है.........

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